भारत में क्यों नहीं हो रहे हैं पर्याप्त नवाचार या आविष्कार

उत्कृष्ट मानव वही है जो समस्याओं का हल निकाले..
नकल करने वाला तो स्पष्ट है कि पिछड़ा ही रहेगा, दूसरों की दया पर निर्भर करेगा, वह स्वाधीन नहीं हो सकेगा; भारत दुर्भाग्य से इसी दिशा में जा रहा है। अपनी‌ श्रेष्ठ भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करिये, और नवाचार और अनुसंधान करिये और स्वाधीन बनिये । स्वाधीनता के बिना जीवन ही क्या !

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क्या हम बालकों को शिक्षा के द्वारा मानव बना रहे हैंं ?

यह तो सभी मानते हैं कि हमें मनुष्य बनने के लिये शिक्षा अत्यंत आवश्यक है । प्रश्न है कि शिक्षा कैसी हो। इसका उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि हमें कैसा मनुष्य या नागरिक बनाना है। क्या शिक्षा दी‌ जाए, क्यों दी जाए, कब दी जाए, कौन दे, और कैसे, यह आदि काल से निर्धारित किया जा रहा है, वह बदलता भी गया हैं, संवर्धित भी।

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अपनी दुनिया से दूर

उसकी खूबसूरती सितारों को मात दे रही थी। उसके चेहरे पर वो कशिश थी कि नज़र एक बार पड़ने के बाद हटना गवारा नहीं करती थी। पूरे पाँच सौ लोगों की भीड़ में हर व्यक्ति उसी को घूर रहा था। लेकिन खुद उसकी निगाहें किसको ढूंढ रही हैं, यह किसी को मालूम नहीं था।
‘‘एक्सक्यूज़ मी, क्या आप मेरे साथ डाँस करना पसंद करेंगी?’’ एक नौजवान उसके पास आकर बोला। लेकिन उसने मुस्कान बिखेरते हुए नहीं में सर को हिलाकर उसे मायूस कर दिया।
‘‘तो तुम्हें भी उसने मना कर दिया।’’ जैसे ही वह नौजवान आगे बढ़ा, उसके दोस्त ने उसे टोक दिया।
‘‘बहुत घमंडी मालूम होती है । उसका नाम क्या है?’’

उड़ने वाला मानव

मि. जोर्ज व्हिर्टर फोदरिंगे... हाँ, यही नाम था उसका ....मैंने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि वह एक दिन चमत्कार कर दिखायेगा... वह उड़ सकेगा... वायु में... बिना किसी सहारे के... एक पक्षी की भांति... एक बार फिर मेरी दृष्टि समाचार की सुर्ख़ियों पर जा गिरी. उड़ने वाला मानव ...

मुझे यकायक विश्वास नहीं हुआ. होता भी कैसे?

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सुहाग के नूपुर

बाला सुब्रामण्यम् अपने हास्पिटल की बेड नं. 5 पर लेटे हुए मरीज का चार्ट देख रहे थे। "सिस्टर आपने इन्हें बेहोशी का, एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दे दिया है?" बाला सुब्रामण्यम् ने पूछा।
"यस डॉक्टर!"
"इन्हें 20 मिनट के बाद होश में आ जाना चाहिए।"
"यस डॉक्टर!"

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पुराकथाओं तथा आधुनिक विज्ञान एवं अनुसंधान की प्रवृतियों का मिलाप करती उच्च कल्पनाशीलता का परिचय देती पुस्तक ' एक और शिखंडी '

डॉ .राजीव रंजन उपाध्याय हिंदी विज्ञान कथाओं के पुरोधा है डॉ.उपाध्याय जी पौराणिक आख्यानों को आधुनिक स्वरुप प्रदान करने में निष्णात है' एक और शिखंडी' उनका ऐसा  ही विज्ञान कथा संकलन  है .कथा ' एक और शिखंडी' एक आधुनिक शिखंडी है लेकिन इसका आधार एक पौराणिक शिखंडी है .महाभारत की कथा  में शिखन्डीनी   को राजा द्रुपद की पुत्री माना जाता है .वह अम्बा के नाम से भी जानी जाती है  .

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भाग ३ - भारत की सही पहचान

हमारी राष्ट्र की परिभाषा का मुख्य आधार संस्कृति है, जीवन मूल्य हैं, यह हम ऋग्वेद में देख चुके हैं। अथर्ववेद में‌इसी‌भावना का विस्तार है; इस के कुछ सूक्त इस परिभाषा को और सुदृढ़ करते हैं, जब वे जन मानस में मानसिक एकता तथा समानता का उपदेश देते हैं। अथर्ववेद के निम्नलिखित सूक्त राष्ट्र की‌ भावनात्मक एकता के लिये बहुत ही उपयोगी ज्ञान/ उपदेश देते है। वैसे तो यह ज्ञान मनुष्य मात्र की एकता का आह्वान करता है, किन्तु विभिन्न देशों की प्रतिद्वन्द्वता को देखते हुए तथा कुछ देशों के जीवन मूल्य इन भावनाओं के विपरीत होते हुए इऩ्हें हमारे राष्ट्र की रक्षा के लिये अनिवार्य शिक्षा मानना चाहिये ।

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